5 मिनट तक गरजी AK-47, अंग-अंग में भर दिया पीतल, 101 नरमुंड की सनक में कर डाले थे 86 कत्लएक नौजवान माफिया जिसने प्रदेश सरकार के नाक में दम कर दिया। दहशत ऐसी कि खिलाफ बोलना तो दूर…कोई उसकी बात तक नहीं कर सकता था। हम बात कर रहे हैं नब्बे के दशक के कुख्यात गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला

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साल 1993…दोपहर ढल रही थी। स्कूल की घंटी के बाद 16 साल की एक लड़की किताबें सीने से लगाए घर की ओर बढ़ रही थी। तभी राकेश तिवारी नाम के शोहदे ने उससे छेड़खानी शुरू कर दी। लड़की किसी तरह खुद को छुड़ाकर भागी। आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। घर पहुंचते ही वह अपने मास्टर पिता से लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़ी। कांपती आवाज में उसने पूरी बात बताई। इस पर पिता तिलमिला उठे और पुलिस के पास जाने लगे। इसी बीच बहन की बेइज्जती की बात उसके भाई तक पहुंच चुकी थी। वह सीधे राकेश तिवारी के सामने पहुंचा। कोई बहस नहीं, कोई चेतावनी नहीं। बस एक के बाद एक दिनदहाड़े राकेश तिवारी के सीने में गोली उतार दी। ये युवा कोई और नहीं श्री प्रकाश शुक्ला था।

 

किस्मत से बच गए वीरेंद्र

गोरखपुर के मामखोर गांव में 1973 में एक सरकारी शिक्षक के घर जन्मा श्रीप्रकाश शुक्ला आगे चलकर पूर्वांचल का कुख्यात गैंगस्टर बना। पहलवानी में रुचि रखने वाले श्रीप्रकाश ने 1993 में अपनी बहन से छेड़छाड़ करने वाले राकेश तिवारी की हत्या की। राकेश तिवारी, पूर्वांचल के बाहुबली हरिशंकर तिवारी का कट्टर विरोधी और विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही का करीबी माना जाता था। इसी कारण अपराध की दुनिया में पहचान बनाने के लिए श्रीप्रकाश ने गोरखपुर में सबसे पहला हमला विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही पर किया। वीरेंद्र किस्मत से बच गए।

Vikas Kumar
Author: Vikas Kumar

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